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क्षेत्रीय सपने, वैश्विक पहुँच, द ग्रेट इंडियन लिटरेरी फ़ेस्टिवल, चतुर्थ संस्करण



अनेकों महान विभूतियों के साथ ग्रेट इंडियन लिटरेरी का चतुर्थ संस्करण १० जनवरी को संपन्न हुआ ।

प्रथम तीन संस्करणों की शानदार सफलता के पश्चात यह चतुर्थ संस्करण ऑनलाइन होने पर भी उसी प्रकार सफल और ज्ञानवर्धक रहा।भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं की उन्नति में प्रयासरत यह एकमात्र मंच है, जो अपने दो दिवसीय आयोजनों में रचनाकारों और प्रबुद्ध व्यक्तियों के विचारों के आदान प्रदान से क्षेत्रीय भाषा के उत्थान का प्रयास करता रहा है ।

प्रथम दिवस प्रमुख क्षेत्रीय साहित्यकारों और विचारकों ने अपने अपने विचारों से उत्सव को सार्थक किया।

टी जी आई एल एफ के संस्थापक अमित शंकर ने क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे नए भारत और राष्ट्र के लिए अनिवार्य बताते हुए इसकी संभावनाओं से सभी को परिचित कराया। उन्होंने भाषा की शुधता पर प्रकाश डालते हुए कहा की हमारा प्रयास होना चाहिए की भाषा को सरल बनने के उपक्रम में कहीं इसके स्वरूप को ही ना नष्ट कर दें।

कार्यक्रम के मुख्य अथिति ,भाजपा, प्रवक्ता श्री सुदेश वर्मा ने हिंदी भाषा की अनिवार्यता को महत्व देते हुए इसे बलपूर्वक नहीं,अपितु धैर्यपूर्वक स्थापित करने के प्रयास पर ज़ोर दिया।

स्वभाषा , स्वबोध,और स्वाभिमान जो की इस अलौकिक मंच का प्रथम पैनल था में में गुजरात के श्री कृष्णकांत उनाड़कुट, ज्योति उनादकट और विजय सोनी, राजस्थान से प्रोफ़ेसर माधव हाड़ा तथा दिल्ली से याचना अरोरा, और श्वेता सिंह सम्मिलित थे।प्रो. हाड़ा ने हिंदी भाषा के विभिन्न रूपों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये सारी भाषाएं एक दूसरी से जुड़ी हुई हैं क्योंकि इनका मूल तो एक ही है, विशेषकर राजस्थानी और गुजराती ।कुमार राकेश ने भारतीय भाषाओं ,विशेष कर हिंदी की वैश्विक परिकल्पना से सभी को अवगत कराया।

द्वितीय पैनल रीजनल लैंग्वेजेस कंसोर्टियम, ग्रोइंग स्ट्रोंगर टूगेदर,में प्रमुख उड़िया लेखक डॉ.देवाशीष पाणिग्रही के अतिरिक्त गोपा नायक, विनीता जेराथ, ऋतिका आचार्य और जारा अलबर्ट ने भाग लिया तथा जीवन और प्रांतों में भाषा के महत्व को प्रतिपादित किया।क्षेत्रीय भाषाओं के विकास से ही देश का विकास संभव है, इस विचार पर सभी एकमत थे ।

10 जनवरी, इस उत्सव का द्वितीय दिवस था ,जिसमें भारत, स्विट्जरलैंड,यूक्रेन,रोमानिया और हंगरी के वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।


प्रमुख व्यंग चित्रकार(कार्टूनिस्ट) अनुपम सिन्हा, डॉ. दिव्या तलवार, रेणु कौल, कुमार राकेश, अमित शंकर और अनुराधा गोयल ने 2021 में हिंदी के उत्थान के लिए आवश्यक प्रयासों पर अपने विचार व्यक्त किए।


हिंदी साहित्य और उसके लेखकों के उन्नयन में प्रयासरत अपनी परम्परा को निर्बाध रखते हुए इस बार सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री भगवती चरण वर्मा का चयन किया गया।उनके कृतित्व और जीवन के कुछ संस्मरणों से उनके पौत्र चन्द्र शेखर वर्मा ने परिचित कराया ।


द्वितीय पैनल में प्रसिद्ध रोमानियन कवयित्री कोरिना जघियातू ,विख्यात उकैरनियान उपन्यासकार स्वेतलाना लवोचकिना, स्विस चित्रकार अर्सला अल्टेंबुच, हंगरी दूतावास के सांस्कृतिक गतिविधियों के निदेशक पाल बोडोग जाबो और यागिका मदान,जो क्षेत्रीय भाषाओं की पक्षधर है और वर्तमान में जकार्ता में हैं, इन सभी ने एक स्वर से क्षेत्रीय भाषाओं के उन्नयन पर बल दिया।

इस आयोजन में विजडम क्यूरेटर ने कन्टेंट पार्टनर के रूप में, सुबरब ने मीडिया सहायक और कर्मा फाउंडेशन ने गुजराती कॉन्टेंट पार्टनर के रूप में अपना सहयोग दिया।


सूत्रधार सुरभि पंत जोशी ने अपनी वाकपटुता से समारोह को सजीव बनाए रखा

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